बीजेपी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने मंगलवार को लखनऊ पहुंचकर सपा मुखिया अखिलेश यादव से मुलाकात की. शत्रुघ्न सिन्हा की इस मुलाकात को अहम माना जा रहा है. कहा जा रहा है कि वे जल्द ही सपा ज्वाइन कर सकते हैं. यही नहीं उम्मीद ये भी जताई जा रही है कि शत्रुघ्न सिन्हा बिहार से सटे एक हाईप्रोफाइल सीट से सपा के उम्मीदवार हो सकते हैं.

कहा जा रहा है कि बीजेपी से खफा चल रहे बिहार के पटना साहिब से पार्टी के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा आगामी लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से ताल ठोक सकते हैं.

उधर अखिलेश यादव से मुलाक़ात के बाद मीडिया से बातचीत में शत्रुघ्न सिन्हा ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की जमकर तारीफ की. उन्होंने अखिलेश यादव को उभरता हुआ सितारा और यूपी का मशहूर नेता बताया. उन्होंने कहा कि इस मुलाकात के कोई मायने नहीं निकलने चाहिए. यह एक शिष्टाचार मुलाक़ात थी. उन्होंने कहा कि अखिलेश एक संस्कारी व्यक्ति हैं.उधर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने भी कहा कि यह एक शिष्टाचार मुलाक़ात थी. अगर ऐसी कोई बात होती तो एक विज्ञप्ति के तहत इसकी जानकारी दी जाती.समाजवादी पार्टी के ऑफिस में मौजूद कुछ बड़े नेताओं ने शत्रुघ्न सिन्हा के वाराणसी से चुनाव लड़ने के संकेत दिए. पार्टी से जुड़े उच्च सूत्रों के अनुसार शत्रुघ्न सिन्हा को वाराणसी से चुनाव लड़वाने को लेकर चर्चा काफी दिनों से चल रही थी. अब इस संबंध में जल्द ही फैसला लिया जा सकता है. हालांकि कुछ लोगों का मानना यह भी है कि समाजवादी पार्टी लखनऊ से किसी सेलेब्रिटी चेहरे को राजनाथ सिंह के खिलाफ उतारने पर भी मन बना रही है. ऐसे में शत्रुघ्न सिन्हा एक चेहरा हो सकते हैं.

सूत्रों के मुताबिक, शत्रुघ्न सिन्हा को वाराणसी से टिकट तभी दिया जाएगा, जब वे 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी छोड़ते हैं. शत्रुघ्न सिन्हा को वाराणसी से टिकट देने के पीछे की मंशा यह भी है कि वे बॉलीवुड के सुपरस्टार रहे हैं और बिहार से सटा जिला होने के नाते वहां उनके प्रशंसक भी ज्यादा हैं. इसके अलावा कायस्थ वोट भी वाराणसी में बड़ी तादाद में हैं.

इस बीच सूत्रों का यह भी कहना है कि सपा वाराणसी में आम आदमी पार्टी से भी समर्थन को लेकर बात कर रही है. दरअसल, 2014 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी से अरविंद केजरीवाल दूसरे नंबर पर रहे थे.वाराणसी के वरिष्ठ पॉलिटिकल एनालिस्ट अमिताभ भट्टाचार्य कहते हैं, "वाराणसी के लोग उन सभी लोगों को पसंद करते हैं, जो अपनी बात बेबाकी से रखते हैं. हो सकता है वाराणसी के लोग परिवर्तन के लिए जाएं. साथ ही यह कहना भी गलत नहीं होगा कि शत्रुघ्न सिन्हा का वाराणसी में अच्छा ख़ासा प्रभाव है."

भट्टाचार्य एक वाकये का जिक्र करते हुए कहते हैं, "बीजेपी उम्मीदवार श्री चंद्र दीक्षित वाराणसी से चुनाव लड़ रहे थे. उनके खिलाफ लेफ्ट के राज किशोर मैदान में थे. हवा राज किशोर के पक्ष में बह रही थी. लेकिन चुनाव से तीन दिन पहले शत्रुघ्न सिन्हा और लालकृष्ण आडवाणी ने जनसभा को संबोधित किया और चुनाव का रुख बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में मोड़ दिया."

भट्टाचार्य का कहना है कि वाराणसी के लोग बेबाक हैं और बेबाकी से अपनी बात रखने वालों को पसंद करते हैं. वाराणसी के लिए कभी भी स्थानीय और बाहरी का कोई मुद्दा नहीं रहा. ऐसा कई बार हुआ है जब वाराणसी के लोगों ने बाहरी नेता को भी कई बार चुना है.

दूसरी तरफ वाराणसी के समाजवादी पार्टी संयोजक आनंद मोहन कहते हैं, “ वाराणसी के लोग बीजेपी शासन से त्रस्‍त हैं. यहां के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के लिए अभी तक कुछ भी नहीं किया है. अब जनता बदलाव चाहती है. शत्रुघ्न सिन्हा को वाराणसी से चुनाव लड़वाने का फैसला पार्टी हाईकमान का होगा. लेकिन अगर शत्रुघ्न सिन्हा वाराणसी से चुनाव लड़ते हैं तो वह भरी मतों से जीतेंगे."