बाईक सवारों ने जंगल में 10 किमी किया पीछा,  सड़क पर पत्थर, टायर रखकर रोकी डॉक्टरों की कार

ख़बरमंत्री न्यूज नेटवर्क

घोड़ाडोंगरी । देश के विभिन्न क्षेत्रों से शुरू हुई बच्चा चोरी की अफवाहें इस समय आदिवासी अंचल में ग्रामीणों के दिलो दिमाग पर इस कदर सवार हो चुकि है कि अफवाहों की वजह से अब लोगों की जान पर बन आ रही है। लाख कोशिशों के बाद भी प्रशासन अब तक इन अफवाहों को रोकने में नाकाम साबित हुआ है। सोमवार की शाम पाढर अस्पताल के 4 डॉक्टर और लुधियाना से आए उनके मित्र डॉक्टर परिवार सहित ऐसी ही अफवाहों से उपजी घटना में मॉब लिंचिंग का शिकार होते बाल बाल बच गए। वो तो ईश्वर की मेहर हुई जो भीड़ में से किसी ने एक डॉक्टर को पहचान लिया, जिसके बाद सभी को छोड़ दिया गया, अन्यथा इस घटना में क्या हो जाता कोई नहीं जानता। गौरतलब है कि पाढर हॉस्पिटल में सर्जन डॉ राहुल के साथ लुधियाना मेडिकल कॉलेज में पढ़े एक मित्र डॉक्टर लुधियाना से पाढर आए हुए थे। मैदानी इलाके से आए अपने मित्र को पहाड़ी क्षेत्र की हरियाली दिखाने के लिए डॉ. राहुल उनकी पत्नी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हैपसीबा, डॉ. विजय उनकी पत्नी डॉ.निलिया मैथ्यू अपने बच्चों के साथ सोमवार साँय 5 बजे अर्जुन गोंदी के जंगल की ओर निकले थे। पांचों डॉक्टर दो कार से जंगल में घूमने और हरियाली देखने निकले थे। khabarmantri.com से चर्चा करते हुए डॉ. राहुल ने बताया कि जब उन्हें अर्जुनगोंदी से आगे घुग्गी मार्ग पर एक हरी भरी टेकड़ी दिखाई दी तो हम सब कार सड़क किनारे खड़ी कर टेकड़ी पर चढ़ गए और फोटोशूट करने लगे। कुछ समय बाद हमारा ध्यान गया तो देखा कि कुछ लोग दूर से हमारी और देख रहे हैं, कुछ बाइक पर सवार लोग भी हमारी गाड़ी के आसपास चक्कर लगा रहे थे लेकिन हमें कुछ समझ नहीं आया । अंधेरा भी होने को हो रहा था सो हम लोग तेजी से नीचे उतर कर कार में बैठकर जाने लगे तो वहाँ कुछ ही दूरी पर रास्ते मे एकत्र लोगों ने हमे रोकने की कोशिश की लेकिन हमें उनकी नियत ठीक नहीं लगी तो हमने कार नहीं रोकी। हमारी कार आगे निकली तो भीड़ में खड़े लोग 5-6 बाइक पर सवार होकर हमारे पीछे लग गए। अब हमें अहसास हो गया कि ये हमारा कुछ बुरा करना चाहते हैं तो हमने कार की स्पीड बढ़ा दी। पीछे की कार को बाइक सवारों ने 2-3 बार ओवरटेक कर रोकने की कोशिश की लेकिन हमने मोबाइल पर पिछली कार में भी मेसेज कर दिया कि कुछ भी हो जाए रुकना नहीं है। हम जैसे तैसे स्पीड में कार चलाकर बाइक सवारों की जद से निकलने में तो कामयाब हो गए लेकिन भटियाकुआँ ढाबे के पास पहुँचे तो हाइवे तक पहुंचने के पहले ही अर्जुनगोंदी वाली रोड के आखिरी मोड़ पर बहुत से लोग सड़क पर पत्थर-टायर डालकर हाथों में लाठियाँ लिए हुए खड़े हैं। अब हाइवे करीब था और रोड से निकलना भी मुमकिन नहीं था सो डरते डरते गाड़ी रोकी और बाहर निकले। बाहर लोग शोर कर रहे थे और हमे बच्चा चोर कह रहे थे और मारने को हो रहे थे कि उसी भीड़ में से किसी ने मुझे पहचान लिया और लोगो को हमला करने से रोक दिया । "अरे ये तो पाढर हॉस्पिटल वाले डॉक्टर साहब हैं" कहता हुआ वह व्यक्ति सबको रोक के आगे आया और हमसे पूछा कि क्या हुआ है, कहाँ से आ रहे हो। हमने उसे सब बताया तो वह कहने लगा था हम लोगों को फोन आया था कि बच्चा चोरी करने वाले इस रोड से भाग रहें है तो हम आपको पकड़ने के लिए आए थे। डॉ राहुल ने बताया कि हमारी बात मान कर हमे पहचानने वाले व्यक्ति ने हमे भीड़ में से निकलवाकर रवाना किया। बकौल डॉ राहुल हमारा परिवार और साथ गए सभी डॉक्टर बहुत डर गए थे। अगर एक व्यक्ति हमे नहीं पहचानता या रास्ते मे हम कार रोक लेते तो पता नहीं हमारे साथ क्या हो जाता।
         बहरहाल घटना के बाद से सभी डॉक्टरों और साथ गए लोगों में दहशत का माहौल है। डॉ राहुल ने khabarmantri.com से चर्चा करते हुए कहा कि हम लोग तो छुट्टी के समय अक्सर जंगल की और अर्जुनगोंदी रोड पर घूमने जाते रहते हैं लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं हुआ जो सोमवार को हुआ। घटना के बाद डॉक्टरों ने मंगलवार को पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर घटना की जानकारी दी, वहीं मामले की जांच और कार्यवाही करने की मांग की है । 

घट सकती थी मॉब लिचिंग की घटना
        सड़क पर पत्थर और टायर होने से नेशनल हाईवे पर अर्जुन गोंदी जोड़ पर ढाबे के पास दोनों कार के रूकते ही उसमें से डॉ. राहुल और डॉ. विजय बाहर आए। इस दौरान आधा सैकड़ा से अधिक ग्रामीण जमा हो गए और डॉक्टरों को बच्चा चोर समझकर उनके साथ आनन-फानन में हमला करने ही वाले थे तभी एक ग्रामीण ने डॉ. राहुल को पहचान लिया। उसने बताया कि यह तो पाढर अस्पताल के डॉक्टर हैं, तब ग्रामीणों ने उन्हें जान दिया। वह तो शुक्र है कि एक ग्रामीण की पहचान से डॉक्टर मॉब लिचिंग का शिकार होने से बच गए वरना गंभीर घटना घटित हो सकती थी। पांचों घबराए डॉक्टर पाढर आए तब उनकी जान में जान आई। 

एसपी को आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई
         मॉब लिचिंग का शिकार होने से बाल-बाल बचे डॉक्टरों ने घटना के अगले दिन मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्तिकेयन लिखित आवेदन देकर मामले की शिकायत की है। डॉक्टरों ने भविष्य में कभी इस प्रकार की घटना ना हो इसके लिए पुलिस सतर्कता बरतने की भी मांग की है। 

             पाढर अस्पताल के डॉक्टरों ने लिखित शिकायत की है। मामले की जांच करने शाहपुर एसडीओपी को निर्देश दिए हैं। शाहपुर एसडीओपी पूरे मामले की जांच करेंगे उसके बाद ही पता चलेगा कि पूरा मामला क्या है ? जो भी दोषी पाया जाएगा कार्यवाही की जाएगी।
कार्तिकेयन के , SP बैतूल

न्यूज़ सोर्स : Khabarmantri News Network