नई दिल्ली: पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सुषमा स्वराज की  कई खूबियों के बारे में बात की. सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि, सार्वजनिक जीवन में उन्होंने कई मिसाल पेश की. उनका भाषण प्रभावी होता था, केवल इतना ही नहीं है. उनका भाषण प्रेरक भी होता था. उनके व्यक्तित्व में विचारों की गहराई का अनुभव हो कोई करता था. अभिव्यक्ति की ऊंचाई हर पल नए मानक पार करती थी. दोनों में से एक होना तो स्वाभाविक है, लेकिन दोनों होना बहुत बड़ी साधना के बाद होता है. 

पीएम मोदी ने दिल्ली के जवाहर लाल स्टेडियम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में कहा कि, बहुत सारे लोग सुषमा स्वराज की विशेषता पर बात करते हैं. वह विन्रम हैं, बेबाक है. लेकिन उनकी एक विशेषता पर कोई बात नहीं करता. पीएम मोदी ने सुषमा स्वराज की प्रमुख विशेषता पर बात करते हुए कहा कि, वह अपनी बात बहुत साफगोई से कहती थी. लेकिन कभी- कभी उनकी बातों में हरियाणवी भाषा का भी प्रयोग होता था. वह जो बात कहती थी उस पर वह टस से मस नहीं होती थी. वह बात की बहुत पक्की थी. 

पीएम मोदी ने बताया कि सुषमा स्वराज को अनुच्छेद 370 के मुद्दे से बहुत जुड़ाव था. उन्होंने सैकड़ों घंटों तक अलग-अलग फोरम में अनुच्छेद 370 और कश्मीर पर बोला होगा. जब सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया तो सुषमा जी के खुशी का ठिकाना नहीं था.  

पीएम मोदी ने बताया कि, इस बार जब सुषमाजी ने लोकसभा चुनाव न लड़ने का फैसला किया, वैसा ही फैसला उन्होंने पहले भी किया था. वे अपने विचारों में बड़ी पक्की रहती थीं. मैंने और वेंकैयाजी ने उनसे मुलाकात की तो उन्होंने मना किया. हमने उनसे कर्नाटक की विपरीत परिस्थितियों में चुनाव लड़ने का आग्रह किया था. उन्होंने परिणाम जानते हुए भी ऐसा किया. इस बार हमने उन्हें बहुत समझाया, लेकिन इस बार उन्होंने सार्वजनिक घोषणा कर दी.

श्रद्धांजलि सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह समेत भाजपा के कई दिग्गज नेता मौजूद हैं. सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सुषमा जी को मैं हमेशा सुषमा दी कहता था. वह जनमन नेता थी. उन्होंने लोगों के मन पर भी राज किया. उन्होंने भाजपा की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अच्छी वकालत की. 370 पर उन्होंने ट्वीट किया था और कहा था कि शायद मैं इसी दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी.चुनाव के दौरान सार्वजनिक सभावों के लिए सबसे ज्यादा उनकी मांग होती थी. भाजपा में 33 फीसदी आरक्षण दिलाने में सुषमा जी का बहुत बड़ा योगदान है.