खरगोन. मध्य प्रदेश के कई जिलों में पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश की वजह से सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि भगवान भी बाढ़ का कहर झेल रहे हैं. लगातार भारी वर्षा से नदियों का पानी खतरनाक स्तर तक पहुंचने लगा है. खरगोन जिले के महेश्वर में नर्मदा नदी (Narmada River) के सभी किनारे और घाट डूब गए (Narmada Floods) हैं. घाट पर बने शिवलिंग जलमग्न हैं. मुख्य घाट पर हनुमान की प्रतिमा का आधा हिस्सा भी बाढ़ में डूबा हुआ है. इलाके में हो रही लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित हो रहा है.

प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

ओंकारेश्वर और इंदिरा सागर बांध से पानी छोड़े जाने के बाद नर्मदा नदी (Narmada River) उफान पर है. नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक महेश्वर (Maheshwar) में नर्मदा नदी में जलस्तर सामान्य से करीब 5 मीटर अधिक हो जाने से घाट डूब गए हैं. प्रशासन ने नर्मदा का जलस्तर बढ़ते देख श्रद्धालुओं, पर्यटकों और साधु-संतों से अपील की है कि वे नदी से दूर रहें. नर्मदा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए प्रशासन ने राहत एवं बचाव के लिए संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया है. जिले के महेश्वर, मण्डलेश्वर, कसरावद और बड़वाह क्षेत्र में नर्मदा किनारे मुनादी कराकर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. प्रशासन की ओर से खतरनाक स्थानों पर राहत टीम और पुलिस को तैनात किया गया है.

बड़वाह में नर्मदा नदी के खतरे के निशान के ऊपर जाने की वजह से यातायात भी प्रभावित है. इंदौर-इच्छापुर हाईवे मोरटक्का पुल से नर्मदा नदी खतरे के निशान के ऊपर बह रही है. रविवार रात 11 बजे से वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस-प्रशासन ने भारी वाहनों के पुल पर से निकलने पर रोक लगा दी है. केंद्रीय जल आयोग कार्यालय के अनुसार रविवार रात करीब 10 बजे नर्मदा नदी खतरे के निशान 163.980 को पार कर ऊपर बह रही है. अधिकारियों ने बताया कि ओंकारेश्वर बांध के 18 गेट से पानी छोड़े जाने से लगातार जलस्तर बढ़ रहा है.