सुप्रीम कोर्ट का फैसला: वनतारा में कोई घरेलू या अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं टूटा
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वनतारा के खिलाफ दायर एक फाउंडेशन की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वनतारा में किसी भी तरह के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है। वनतारा के खिलाफ ये याचिका करणार्थम विरम नाम की एक फाउंडेशन ने दायर की थी। याचिका में केंद्र सरकार, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण और अन्य को निर्देश देने की मांग की गई थी। इसमें वनतारा पर जानवरों से संबंधित कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया था।
कोर्ट ने पिछले साल इस तरह की एक याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने जस्टिस जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली एसआईटी की वनतारा को दी गई क्लीन चिट को स्वीकार कर लिया था। फाउंडेशन की याचिका पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ ने एसआईटी की रिपोर्ट को सही ठहराया। यह मुद्दा नया नहीं है। इससे जुड़ी एक याचिका पहले भी दायर हो चुकी थी, जिस पर कोर्ट पहले ही विचार कर चुका है। 15 सितंबर 2025 को कोर्ट ने एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था। याचिकाकर्ता ने जिस अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज का हवाला दिया, वह उसके पक्ष में नहीं था।
जानकारी के मुताबिक जानवरों का आयात जरूरी परमिट और दस्तावेजों के साथ किया गया था, और यह व्यापार के लिए नहीं था। अगर जानवरों का आयात पहले सही तरीके से हुआ है, तो बाद में आपत्ति उठाने से वह अवैध नहीं बन जाता। केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाएं वनतारा और उसके हाथी ट्रस्ट को 2019 से अब तक दी गई सभी अनुमति, मान्यता और लाइसेंस का पूरा रिकॉर्ड कोर्ट में पेश करें। खास तौर पर जानवरों के आयात और निर्यात से जुड़े सभी लाइसेंस और परमिट की जानकारी दी जाए। एक नई स्वतंत्र राष्ट्रीय समिति बनाई जाए, जो वन्यजीव व्यापार की निगरानी करे। इस समिति का नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज करें।
चार सदस्यीय एसआईटी का नेतृत्व पूर्व जज जस्टिस जे चेलमेश्वर ने किया था और टीम में जस्टिस राघवेंद्र चौहान, पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले और कस्टम्स अधिकारी अनिश गुप्ता शामिल थे। एसआईटी ने 12 सितंबर को रिपोर्ट सौंप दी थी। कोर्ट ने एसआईटी की सराहना की और कहा कि समिति को मानदेय भी दिया जाए।

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