जबलपुर में दिव्यांग बच्चों को निकालने पर हाईकोर्ट का सख्त रुख
जबलपुर|दिव्यांग बच्चों को स्कूल से बाहर किए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि बच्चों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव न सिर्फ गलत है, बल्कि किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं किया जाएगा।
मामला जबलपुर शहर के विजडम वैली स्कूल और जीडी गोयनका स्कूल से जुड़ा है। इन पर आरोप है कि स्पेशल (दिव्यांग) बच्चों को स्कूल से बाहर किया जा रहा था। शिकायत सामने आने के बाद इस मुद्दे पर जनहित याचिका दायर की गई। सोमवार 20 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की डिवीजन बेंच ने तत्काल प्रभाव से दिव्यांग बच्चों को निकाले जाने पर रोक लगा दी। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी (डीईअओ) को आदेश दिया कि जबलपुर के सभी स्कूलों में पढ़ रहे विशेष बच्चों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल तय की गई है।
जमीनी हकीकत कमजोर
याचिकाकर्ता सौरभ सुबैया की ओर से दायर याचिका में बताया गया कि जबलपुर में करीब 50 सरकारी और 200 निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में दिव्यांग छात्र पढ़ते हैं। इनमें कई बच्चे ऐसे हैं जो न बोल सकते हैं और न ही सुन सकते हैं।
कानूनों का पालन अधूरा
याचिका में यह भी बताया गया कि स्कूलों में आज भी विशेष शिक्षक नियुक्त नहीं हैं। जबकि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत यह अनिवार्य है। इन कानूनों का पालन न होना पूरी तरह अवैधानिक है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिवेंद्र पाण्डेय ने कोर्ट को बताया कि निजी स्कूलों द्वारा स्पेशल बच्चों को बाहर करना सीधे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इस पर कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया।

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