समोसे खरीदने के लिए ट्रेन रोक दी? वायरल वीडियो पर रेलवे ने बताया पूरा सच
इंदौर। इंदौर-महू रेलखंड पर भारतीय रेलवे के एक लोको पायलट द्वारा बीच रास्ते में ट्रेन रोककर समोसे खरीदने का एक बेहद दिलचस्प और हैरान करने वाला वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर इस वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं, जिसे लेकर नेटिजन्स तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। वीडियो के साथ इंटरनेट पर यह दावा पुरजोर तरीके से किया जा रहा है कि लोको पायलट ने अपनी भूख मिटाने और नाश्ता लेने के लिए एक व्यस्त रेल मार्ग के बीच में ही पूरी पैसेंजर ट्रेन को खड़ा कर दिया। हालांकि, इस मामले के तूल पकड़ने के बाद पश्चिम रेलवे के उच्चाधिकारियों ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज करते हुए सच्चाई सबके सामने रखी है।
वायरल वीडियो में ब्रिज से उतरकर समोसा लाता दिखा सहायक लोको पायलट
इंटरनेट पर तेजी से प्रसारित हो रहे इस चंद सेकंड के वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि एक सहायक लोको पायलट (एएलपी) रेल पटरी और रेलवे ब्रिज से नीचे उतरता है। वह पास ही स्थित एक स्थानीय दुकान पर जाता है और वहां से समोसे खरीदकर, हाथ में गर्म नाश्ते की थैली लिए वापस ऊपर की ओर आता है। इसके बाद वह मुस्तैदी से दोबारा ट्रेन के मुख्य इंजन में चढ़ जाता है। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ट्रेन पटरियों पर शांत खड़ी दिखाई देती है और आसपास मौजूद स्थानीय लोगों की भारी भीड़ भी इस पूरे वाकये को कौतूहलवश देखती और अपने कैमरों में रिकॉर्ड करती नजर आ रही है।
भूख के कारण बीच रास्ते में ट्रेन रोकने का किया जा रहा है भ्रामक दावा
विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल्स और मीम पेजेस द्वारा इस वीडियो को एक खास नैरेटिव के साथ साझा किया जा रहा है। वीडियो पोस्ट करने वाले यूजर्स का दावा है कि ट्रेन को किसी तकनीकी खराबी या सिग्नल की वजह से नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ इसलिए रोका गया था क्योंकि चालक दल को सुबह के समय तेज भूख लगी थी और वे समोसे का स्वाद चखना चाहते थे। इस दावे के सामने आने के बाद रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और समयपालन (पंक्चुअलिटी) पर कई तरह के गंभीर सवाल खड़े होने लगे थे, जिससे विभाग की साख पर भी असर पड़ रहा था।
पश्चिम रेलवे ने दावों को सिरे से नकारा और पूरी वास्तविकता की स्पष्ट
इस पूरे विवाद और वायरल वीडियो पर मचे हंगामे को शांत करते हुए पश्चिम रेलवे के जनसंपर्क विभाग ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। रेलवे प्रशासन ने साफ लफ्जों में कहा है कि इंटरनेट पर किया जा रहा दावा पूरी तरह से गलत, मनगढ़ंत और भ्रामक है। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेन को समोसे खरीदने के लिए कतई नहीं रोका गया था, बल्कि वह इलाका एक निर्धारित क्रॉसिंग या तकनीकी ठहराव का हिस्सा था, जहां नियमों के तहत ट्रेन को पहले से ही रुकना तय था। ट्रेन के खड़े रहने के दौरान ही सहायक लोको पायलट ने खाली समय का उपयोग कर नीचे से नाश्ता लिया था।
इंटरनेट पर अफवाहों से बचने और सच्चाई परखने की रेलवे ने की अपील
रेलवे अधिकारियों ने इस भ्रामक खबर के फैलने पर चिंता व्यक्त करते हुए आम जनता और इंटरनेट यूजर्स से अपील की है कि वे बिना जांच-परख के किसी भी वीडियो के साथ किए जा रहे दावों पर भरोसा न करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेलवे में सुरक्षा मानकों और समय सारणी का बेहद कड़ाई से पालन किया जाता है, और कोई भी लोको पायलट अपनी मर्जी से ट्रेन को कहीं भी नहीं रोक सकता। प्रशासन ने कहा कि इस तरह के आधे-अधूरे वीडियो को सनसनी बनाने के बजाय लोगों को जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभानी चाहिए और आधिकारिक सूत्रों से ही जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।

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