कलेक्टर के औचक निरीक्षण में खुली स्कूल की पोल, 162 छात्रों में एक भी नहीं मिला मौजूद
मुरैना:कलेक्टर के औचक निरीक्षण से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है, जिसके बाद ग्रामीण इलाकों की बदहाल जमीनी हकीकत खुलकर सामने आ गई है. जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही के चलते सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिल रहा है. कन्हार क्षेत्र के औचक दौरे पर पहुंचे प्रशासनिक दल को हर तरफ अव्यवस्थाओं का अंबार मिला, जिसने शासकीय कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है.
हायर सेकेंडरी स्कूल में सन्नाटा, कागजों में सिमटी शिक्षा
क्षेत्र के कन्हार स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी विद्यालय में उस वक्त बेहद चौंकाने वाली स्थिति निर्मित हो गई, जब औचक जांच के दौरान स्कूल परिसर में एक भी विद्यार्थी मौजूद नहीं मिला. शासकीय रिकॉर्ड के अनुसार इस शिक्षण संस्थान में कुल 162 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन धरातल पर उपस्थिति शून्य दर्ज की गई. इस गंभीर लापरवाही और सन्नाटे को देखकर प्रशासनिक अधिकारी भी दंग रह गए. यह स्थिति साफ तौर पर दर्शाती है कि क्षेत्र के जिम्मेदार शिक्षा अधिकारी और शिक्षक अपने कर्तव्यों के प्रति कितने उदासीन हैं, जिसके कारण बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है.
बुनियादी सुविधाओं का टोटा, दावों की खुली पोल
विद्यालय परिसर की पड़ताल करने पर यह बात सामने आई कि वहां नौनिहालों के लिए पीने के साफ पानी तक की कोई व्यवस्था नहीं है. इसके साथ ही पूरा परिसर बिजली जैसी अत्यंत आवश्यक बुनियादी सुविधा से भी महरूम पाया गया. क्षेत्र के निवासियों का साफ तौर पर कहना है कि आवश्यक सुविधाओं के अभाव के कारण ही बच्चे स्कूल आने से कतराते हैं. स्थानीय जनता ने प्रशासन पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि कागजों पर विकास योजनाओं और रख-रखाव के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट ठिकाने लगाया जा रहा है, जबकि हकीकत में बच्चों को बैठने के लिए न्यूनतम सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हो पा रही हैं.
पशु चिकित्सालय खुद बीमार, जर्जर भवन में तालेबंदी जैसे हालात
प्रशासनिक जांच का दायरा जब आगे बढ़ा तो कन्हार का पशु औषधालय भी पूरी तरह बदहाल और सफेद हाथी साबित हुआ. इस चिकित्सालय का भवन अत्यंत जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है, जहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. अस्पताल परिसर में न तो कोई नियमित पशु चिकित्सक तैनात है, न ही जरूरी जीवनरक्षक दवाइयों का कोई स्टॉक उपलब्ध है. पूरा केंद्र स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है. ग्रामीणों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि मानूसन के इस दौर में जब मवेशियों में बीमारियां तेजी से फैलती हैं, तब उन्हें मजबूरन महंगे दामों पर निजी डॉक्टरों की सेवाएं लेनी पड़ती हैं, जिससे गरीब किसानों पर भारी आर्थिक संकट मंडरा रहा है.
आक्रोशित ग्रामीणों ने उठाई सख्त कदम उठाने की मांग
इस चौतरफा बदहाली को लेकर अब स्थानीय निवासियों का आक्रोश फूट पड़ा है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों से इस पूरे मामले में संलिप्त दोषियों पर तत्काल और कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है. क्षेत्र की जनता का कहना है कि स्कूल में बिजली-पानी की व्यवस्था को युद्धस्तर पर सुधारा जाए और शिक्षकों की जवाबदेही तय की जाए. इसके साथ ही पशु चिकित्सालय में नियमित डॉक्टर और पर्याप्त दवाइयों का प्रबंध तुरंत सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम जनता को बुनियादी अधिकारों और सुविधाओं के लिए दर-दर न भटकना पड़े.

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