कपालभाती- PCOD की समस्‍या 
कपालभाती आसन करने से महिलाओं में होनी वाली PCOD की समस्या से भी बचा सकता है। पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम या पीसीओडी एक ऐसी बीमारी है जिसमें ओवरी में मल्टीपल सिस्ट बन जाते हैं। ये सीस्ट खास किस्म के तरल पदार्थ की थैलियां होती हैं जो पीरियड्स में बाधा डालती है। माना जाता है कि इसका नियमित अभ्यास करने से न केवल PCOD से राहत बल्कि शरीर से जहरीले पदार्थ भी बाहर निकाल देता है जिससे चेहरे पर ग्लो और बाकी प्रॉबल्म से राहत मिलती है।    

उत्तानासन- पेट और कमर की चर्बी कम
अधिकतर महिलाओं पेट और कमर के आस-पास के बढ़ी हुआ चर्बी से परेशान रहती है क्योंकि यह न केवल उनकी बॉडी शेप को बिगाड़ देती है बल्कि इससे कई तरह की बीमारियां भी घेर लेती है। इसलिए पेट और कमर की चर्बी को कम करने के लिए उत्तानासन सबसे अच्छा योगासन है। इस आसन को करने से कंधे और हाथों की मांसपेशियां मजबूत भी मजबूत होती हैं। 

सर्वांगासन- ग्लोइंग स्किन
इस आसन का अभ्यास कंधे के बल खड़े होकर किया जाता है। सर्वांगासन को ग्लोइंग या चमकदार त्वचा के लिए सबसे असरदार आसन माना जाता है। इस आसन के अभ्यास से न सिर्फ स्किन की सेहत सुधरती है बल्कि चेहरे का ब्लड सर्कुलेशन भी बढ़ता है। सर्वांगासन का अभ्यास दिन में 3-5 बार करें।

शीर्षासन- झड़ते बालों से राहत
आजकल अधिकतर महिलाओं को झड़ते बालों की समस्या से जूझ रही हैं जिसकी वजह शायद उनका गलत लाइफस्टाइल व खानपान है लेकिन आप योग के जरिए इससे छुटकारा पा सकते हैं। अगर बात बालों के लिए बेस्ट योगासन की तो शीर्षासन करें। इस आसन को रोजाना करने से झड़ते बालों की समस्या दूर होती है।

विपरीत करणी आसन-थायराइड प्रॉबल्म 
विपरीत करणी मुद्रा करने से थायराइड के सभी रोगों में हाइपो और हाइपर दोनों को संतुलित करने में मदद मिलती है। जिन महिलाओं को थायराइड की समस्या रहती है, उन्हें इसका अभ्यास नियमित करना चाहिए। अगर आप गर्भवती हैं तो ऐसी स्थिति में विपरीत करणी आसन दीवार से सटकर करें और संभव हो तो किसी इंस्ट्रक्टर के देख-रेख में ही इसे करें।

कुंडलिनी योग-पीरियड्स व मेनोपॉज में राहत
कुंडलिनी योग को 'लाया योग' के नाम से भी जाना जाता है, जो हिंदू धर्म के शक्तिवाद और तंत्र विद्याओं से प्रभावित है।महिलाओं के लिए यह आसन करना बेहद फायदेमंद होता है। इस आसन को करने से न सिर्फ पीरियड्स दर्द से राहत मिलती है बल्कि यह मेनोपॉज के लक्षणों को भी दूर करता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह आसन अच्छा माना जाता है। प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीनों में महिलाओं के लिए यह आसन करना बेहद फायदेमंद है। इससे कमर दर्द, मूड़ स्विंग जैसी परेशानियां नहीं होती।

बालासन- जांघों की चर्बी कम 
घुटनों को पीछे की ओर मौड़ कर घुटनों के बल बैठ जाएं। ऐडियों पर शरीर का वज़न बनाते हुए, सांस अंदर लेते हुए आगे की और झुकें। हथेलियां ज़मीन की ओर लगाएं। ध्यान रहें कि छाती जांघों और घुटनों के अगले भाग को छुनी चाहिए। साथ ही आपका सिर जमीन को छूना चाहिए। इस आसान को करने से जांघों की चर्बी कम होगी औ कंधों का दर्द दूर।

तितली आसन-गर्भाश्य प्रॉबल्म
महिलाओ में गर्भाश्य संबंधित समस्या और मांसपेशियों में खिचाव भी योगासन में छिपा है। तितली आसन करना एक तो आसान होता है दूसरा इससे महिलाओं को काफी फायदे भी मिलते है। इस आसन को आप रोजाना थोड़ा सा समय निकालकर  सकती हैं मगर गर्भवती महिलाएं प्रैग्नेंसी पहले तीन महीने ही इसका अभ्यास करें और जितना झुक सकती है, उतना ही नीचे की तरफ झुके।