मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह भले ही प्रदेश में नशे की सप्लाई तो़ड़ने की बात करते रहे हों, लेकिन उनके अपने ही शहर में नशे का नेक्सस नहीं टूट पाया है। पटियाला के प्रेम नगर में नशा न बेचने पर ब्लैकमेलिंग का शिकार हो रहे एक युवक ने आखिरकार आत्महत्या कर ली। युवक ने सरकारी राजिंदरा अस्पताल स्थित नशा मुक्ति केंद्र के बाथरूम में फंदा लगाया। आत्महत्या के लिए वह अस्पताल के वार्ड से स्टूल लेकर गया था।

24 साल के लवदीप सिंह को उसकी कॉलोनी के ही एक व्यक्ति ने स्मैक की लत लगा दी थी। लवदीप अविवाहित था और संगरूर स्थित मोटर कंपनी में काम करता था। नशे के कारण उसकी नौकरी भी छूट गई थी। वह उधार लेकर नशा करने लगा, लेकिन पैसे नहीं चुका पाया। इस पर उसे नशा बेचने के लिए मजबूर किया जाने लगा। लवदीप ने नशा छोडऩे का फैसला किया और परिवार से बात की।

परिवार ने 16 मई को उसे नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करा दिया। लवदीप के चाचा अमरिंदर सिंह ने कहा उन्होंने 15 मई को थाना सिविल लाइन में शिकायत भी दी थी, लेकिन पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया। लवदीप को नशा मुक्ति केंद्र के अंदर भी फोन पर धमकियां मिलती रहीं, जिससे तंग आकर उसने जान दे दी। अस्पताल में उसे बचाने का उचित प्रबंध नहीं था। अस्पताल के सीसीटीवी भी बंद थे और सिक्योरिटी गार्ड ड्यूटी पर नहीं था।

 

एसडीएम को सौंपी जांच

मामले की जांच अब एसडीएम अरविंदर सिंह अरोड़ा को सौंप दी गई है। उन्होंने शनिवार को ही केंद्र का दौरा करते सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल की व कुछ दस्तावेज कब्जे में लिए। वहीं, थाना सिविल लाइन के इंचार्ज रमनदीप सिंह ने कहा कि पुलिस ने सारा रिकॉर्ड चेक कर लिया है। लवदीप के परिवार की तरफ से कोई शिकायत नहीं मिली है। जांच की जा रही है।