'मैं नक्सली बनना चाहता था'—पवन कल्याण का चौंकाने वाला खुलासा
दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और वर्तमान में आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने अपनी जिंदगी को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उनकी जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया था, जब वे समाज की व्यवस्था से इस कदर नाराज थे कि बंदूक उठाकर नक्सली बनने की राह पर चल पड़े थे। यह उनकी किशोरावस्था का समय था। हालांकि, ऐन वक्त पर उनके बड़े भाई और मेगास्टार चिरंजीवी के हस्तक्षेप और सही मार्गदर्शन के कारण वे इस खतरनाक रास्ते पर जाने से बच गए।
चिरंजीवी की प्रेरणा से बदली जिंदगी की राह
हाल ही में एक राष्ट्रीय समाचार एजेंसी से विशेष बातचीत के दौरान पवन कल्याण ने अपनी जिंदगी के इस अनसुने पहलू से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया, "जब मैं अपनी किशोरावस्था के आखिरी दौर में था, तो दुनिया के हालातों को देखकर मेरे भीतर भारी आक्रोश था। मैं बंदूक उठाकर नक्सली आंदोलन में शामिल होना चाहता था। मैं कुछ गुप्त जन-सभाओं में भी गया था। लेकिन तभी मेरे बड़े भाई चिरंजीवी ने मेरे इस गुस्से को भांप लिया और मुझे विनाश के बजाय एक रचनात्मक रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।"
80 के दशक की वैश्विक अशांति का था दिमाग पर असर
पवन कल्याण ने बताया कि 80 के दशक में जब वे 17 से 21 साल के थे, तब दुनिया भर में हो रही हिंसक और राजनीतिक घटनाओं का उनके कोमल मन पर गहरा असर पड़ रहा था। उस दौर में दक्षिण अफ्रीका का रंगभेद आंदोलन, श्रीलंका में लिट्टे (LTTE) का उग्रवाद, शीत युद्ध (कोल्ड वॉर) का तनाव, जर्मनी का विभाजन और भारत में पनपा खालिस्तानी उग्रवाद जैसी घटनाओं ने उनके भीतर व्यवस्था के प्रति गहरा गुस्सा भर दिया था। उन्हें लगने लगा था कि इन सब अन्यायों का एकमात्र समाधान बंदूक उठाना ही है।
शॉर्ट फिल्में और डॉक्यूमेंट्री बनाकर निकाला गुस्सा
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि वे उस समय इस कदर जुनूनी हो चुके थे कि छात्रों की ऐसी सभाओं में चले जाते थे जहां उन्हें कोई पहचानता तक नहीं था। गुस्से को शांत करने और समाज को समझने के लिए वे शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल्स में हिस्सा लेने और डॉक्यूमेंट्री बनाने के सिलसिले में मुंबई भी गए। वे लगातार नए-नए प्रयोग कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद वे भीतर से खुश नहीं थे। वे खुद को एक मानसिक जाल में फंसा हुआ और बेहद गुस्से में महसूस करते थे।
भाई के एक सवाल ने कर दिया निरुत्तर
पवन कल्याण ने उस भावुक पल को याद करते हुए बताया कि जब उनके भाई चिरंजीवी ने उनसे उनके इस पागलपन भरे गुस्से की वजह पूछी, तो उन्होंने कहा कि वे समाज में फैले अन्याय के खिलाफ लड़ना चाहते हैं। इस पर चिरंजीवी ने उन्हें समझाते हुए एक बेहद व्यावहारिक सवाल पूछा।
चिरंजीवी ने कहा— "यदि तुम्हारा भाई चिरंजीवी न होता और तुम पर परिवार की जिम्मेदारियां होतीं, अगर तुम्हारी मेहनत की कमाई और सैलरी पर पूरा परिवार निर्भर होता, तब भी क्या तुम यही कदम उठाते?" पवन कल्याण ने बताया कि इस सवाल का उनके पास कोई जवाब नहीं था और वे पूरी तरह खामोश हो गए। भाई की इस सीख के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले अध्यात्म का रास्ता चुना, जिसने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया।

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