मंगलसूत्र को वैवाहिक जीवन का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। मंगलसूत्र को सुहागिन महिला की पहचान माना गया है। मंगलसूत्र के बिना सुहागिन महिला का श्रृंगार अधूरा बताया गए है। इस प्रकार से एक सुहागिन महिला के लिए मंगलसूत्र बहुत महत्वपूर्ण चीज है। मालूम हो कि मंगलसूत्र काले मोतियों की एक माला होती है और सुहागिन महिलाएं इसे अपने गले में पहनती हैं। मंगलसूत्र के अंदर कई सारी चीजें होती हैं और इन सभी चीजों का शुभता से संबंध होता है। ऐसी मान्यता है कि मंगलसूत्र धारण करने से सुहागिन के सुहाग यानी कि पति की रक्षा होती है। मंगलसूत्र धारण करने वाली महिला का पति जीवन में संकंटों का सामना नहीं करता।

 
एक सुहागिन महिला द्वारा मंगलसूत्र धारण करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाता है। सबसे जरूरी यह है कि मंगलसूत्र स्वयं पत्नी या पति द्वारा खरीदा हुआ होना चाहिए, किसी तीसरे के द्वारा नहीं। साथ मंगलवार के दिन मंगलसूत्र नहीं खरीदना चाहिए। इसे अपशगुन माना गया है। सुहागिन महिला द्वारा मंगलसूत्र पहनने से पहले इसे माता पार्वती को अर्पित करना चाहिए। ध्यान रहे कि मंगलसूत्र को बार-बार उतारने की सख्त मनाही है। यानी कि बहुत जरूरी होने पर ही मंगलसूत्र उतारना चाहिए। बता दें कि मंगलसूत्र में लगने वाले सोने का चौकोर होना उत्तम माना गया है।

 
ज्योतिष शास्त्र में भी मंगलसूत्र का विस्तृत उल्लेख किया गया है। ज्योतिष के अनुसार मंगलसूत्र के पीले धागे और सोने या पीतल का संबंध बृहस्पति ग्रह से है। ऐसे में जो सुहागिन महिलाएं नियमित रूप से मंगलसूत्र धारण करती हैं, उन्हें बृहस्पति से संबंधित शुभ फल प्राप्त होता है। इसके साथ ही मंगलसूत्र के काले मोतियों से सुहागिन महिलाओं की बुरी नजर से रक्षा होती है। इससे उनका वैवाहिक जीवन काफी सुख-शांति से व्यतीत होता है। कहते हैं कि मंगलसूत्र के काले हिस्से में माता पार्वती और पीले में भगवान शिव का वास होता है।