नगर परिषद में आबादी भूमि में बड़े घोटाले की आशंका
निलंबित सीएमओ के कार्यकाल में हुए अवैध नामांतरण और नो ड्यूज
विकास बत्रा 9425002223
ख़बरमंत्री न्यूज़ नेटवर्क
बैतूल। प्रदेश के नगरीय और पंचायत क्षेत्रों में आबादी भूमि के रिकॉर्ड संधारण का जिम्मा स्थानीय निकायों का है। शहरी क्षेत्रों में नगर परिषद, नगर पालिका और नगर निगम में इनका रिकॉर्ड संधारण होता है। अभी राजस्व अमले के पास इसका अलग अलग रिकॉर्ड नहीं है। लेकिन आबादी भूमि के रिकॉर्ड का जिम्मा रखने वाले ही उसमें हेराफेरी करने लग जाएं तो जनता के हितों से तो खिलवाड़ ही हो जाएगा। कुछ ऐसा ही हुआ है घोड़ाडोंगरी नगर परिषद कार्यालय में । यहां निलंबित सीएमओ ऋषिकांत यादव के कार्यकाल में आबादी भूमि के नामांतरण और नो ड्यूस जारी करने के मामले में जमकर फर्जीवाड़ा होने की जानकारी मिल रही है। पता चला है कि कुछ ऐसे भी नामांतरण दर्ज कर दिए गए हैं जिसमे नियमानुसार ना तो अखबार में विज्ञप्ति का प्रकाशन कराया गया है और ना ही परिषद की बैठक में प्रस्ताव पारित हुआ है। ऐसे 3–4 मामलों में फर्जीवाड़ा होने की जानकारी मिली है। एक मामला तो सेंट्रल चौक की भूमि का है जिसमें नामांतरण की वैधानिक प्रक्रिया अपनाए बिना ही फर्जी तरह से फौती नामांतरण दर्ज कर दिया गया है। इस मामले में भू स्वामी को 4 अलग अलग भूमियों के नो ड्यूज भी फर्जी तरीके से जारी कर दिए गए हैं। एक नो ड्यूज दुर्गा चौक स्थित भूमि का है तो तो तीन सेंट्रल चौक की भूमि के हैं। नामांतरण की यह फाइल 2 साल से लंबित थी जिसे भारी लेन देन करके निपटाने की खबरें सामने आ रही हैं।
आबादी के रिकॉर्ड में भी हेराफेरी की आशंका
निलंबित सीएमओ ऋषिकांत यादव के कार्यकाल में आबादी के रिकॉर्ड में भी जमकर हेराफेरी होने की आशंका है। पता चला है कि निलंबित सीएमओ ने अपने कार्यकाल में अपने विश्वस्त को राजस्व शाखा का प्रभारी बनाया और वैधानिक कारणों से वर्षों से लटके मामलों का लेनदेन कर अवैध तरह से निराकरण कर दिया है। अब सीएमओ के निलंबन के बाद यह सारी फाइलें खुलने की संभावना है।
अपराधिक कृत्य है रिकॉर्ड में हेराफेरी
शासकीय रिकॉर्ड में हेराफेरी करना अपराधिक कृत्य है। आबादी भूमि के मामले में जो भी हेराफेरी सामने आती है उसमें नगर परिषद के तत्कालीन अधिकारी, संबंधित कर्मचारी और जिसे लाभ देने के लिए यह किया गया है उस भू स्वामी पर FIR दर्ज हो सकती है। इस मामले में परिषद के एक परिवीक्षाधीन कर्मचारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। अगर यह दोषी पाया जाता है तो परिवीक्षा अवधि में शासकीय नियमों का उल्लंघन और हेरा फेरी करने के कारण इसके सीधे बर्खास्त होने की संभावना है। बहरहाल आने वाले दिनों में नगर परिषद के निलंबित सीएमओ और परिवीक्षाधीन कर्मचारी का यह कारनामा बड़ा भूचाल ला सकता है।

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